Shree Hanuman Ji Mandir, Golasan Temples in Sanchore

Shree Hanuman Ji Mandir, Golasan Temples in Sanchore

उपखंड मुख्यालय सांचौर की इस पवित्र धन्य धरा पर आस्था से जुडी दक्षिण दिशा की और गुजरात राज्य के नजदीक 10 कि.मी. पर स्थित गोलासन गाव में स्वयंभू पर्कट हनुमानजी मंदिर हजारों लोगो की आस्था का केन्द्र है

हकीकत दावे के साथ नही पर ऐसा मन जाता है की पुराने समय में हजारों साल पूर्व में एक ग्वाला जोधाराम दहिया

उपखंड मुख्यालय सांचौर की इस पवित्र धन्य धरा पर आस्था से जुडी दक्षिण दिशा की और गुजरात राज्य के नजदीक 10 कि.मी. पर स्थित गोलासन गांव में स्वयंभू प्राकट्य हनुमान जी मन्दिर हजारो लोगो की आस्था का केन्द्र है। हकिकत दावे के साथ नही पर ऐसा माना जाता है कि पुराने समय हजारो वर्ष पूर्व

में एक ग्वाला जोधाराम दहिया रबारी जो जंगल (गोचर ) में गाये चरा रहा था। अचानक जोरदार हवा के साथ तेज आकाश से गर्जना हुई और धरती को चीरते हुए जमीन के अन्दर से एक अलौकिक मूर्ति निकली।और आवाज तेज होने से गाये इधर-उधर भागने लगी तब गायो का ग्वाला जोधाराम ने हो – हो –
हो कि आवाज लगाई तो हनुमान जी वही रूक गए । डरा हुआ जोधाराम भागता हुआ गांव में आया और लोगो को बात बताई। उस समय में गांव के वीरमाजी भोड ओपजी पुरोहित आदि लोग वहां गए और देखा कि ये तो हनुमान जी की मूर्ति स्वय निकली है।

ये चमत्कार से कम नही है। तब से लोगो ने श्री हनुमान जी की
पुजा अर्चना की एवंम् समयानुसार एक चौकी का निर्माण किया। उस समय श्री हनुमान जी जालवृक्ष के नीचे विराजमान थे। हनुमान जी के आगे पाताल तक एक खड्डा (कुई) था। जो आज भी विधमान है। धीरे-धीरे हनुमान जी आस-पास के लोगो के आस्था के केन्द्र बन गए। आस-पास के सभी गांवो में ये चमत्कार फेल गया।

श्री हनुमान जी के आगे जो खड्डा (कुई ) थी उसकी गहराई नापने के लिए गांव के ही पंडित स्व. हस्तीमल जी श्रीमाली एवम् लक्ष्मण
चौधरी व अन्य लोगो ने मिलकर पांच खाट (चारपाई) की रस्सी लेकर आगे पत्थर बांध कर उस खड्डे (कुई ) में डाला लेकिन उस खड्डे का अंत नही आया।
और ये चमत्कार वर्तमान में भी मौजूद है। इस खड्डे में श्रीहनमान जी के भक्त तेल सिन्दर चढाते है वो उस खड्डे में ही जाता है लेकिन आज तक ये खड्डा नही भरा,
यहां साधको की मनोकामना पूर्ण होती है, जो इस दरबार मे मन्नत मांगता है उसको फल अवश्य मिलता है श्री हनुमान जी के चमत्कार खूब है।
पूराने समय में यह क्षेत्र सघन जालो से आच्छादित था रात्रि में एक चोर ने घण्टा चूराया लेकिन पूरी रात रास्ता खोजता रहा रास्ता नही मिला वह अंधा हो गया प्रातकाल अपने आप को हनुमान जी के दरबार में पाया।

उस समय से लगाकर आज तक हर महीने की पूर्णिमा को हजारों भक्त दर्शन के लिए आते है यहाँ पर हर पूर्णिमा एवं मंगलवार, शनिवार पैदल लोग दर्शन हेतु आते है साधु महात्मा हनुमान पूरी, ओमपूरी जी, ऋषिगिरी नाथ जी महाराज गणेशपूरी जी
महाराज तथा श्री पुनमपुरी महाराज जैसे कई महान तापस्विओ की पुण्य स्थल रहा है यहां पर श्री हनुमान जी के महान भक्त श्री गुलाबपूरी जी की जीवित समाधि भी है यह स्थान प्राचीन मुगल शासकों के हमलों को भी सहन कर चुका है लेकिन बजरंगी की महिमा और चमत्कार के आगे सब धराशायी हुए।
वर्तमान में मठाधीश श्री श्री 1008 श्री पुनमपुरी जी महाराज है। मन्दिर की प्रतिष्ठा ज्येष्ठ शक्ल तृतीया को आज से लगभग 20 वर्ष पर्व हई। जिसके आचार्य विजयराम जी व्यास एवं पंडित ईश्वरलाल जी श्रीमाली जी गोलासन सहित विद्वद पंडित थे।

दक्षिणामुखी हनुमान जी दिव्य एवं अलौकिक है इनके बायें पैर के नीचे शनि महाराज की मूर्ति है जिस पर श्रद्वालओं द्वारा तेल सिंदर का अभिषेक किया जाता है कालांतर में विकास की गाथा को आगे बढ़ाने का कार्य
हनुमान जी के परम भक्त ट्रस्ट के मानद सदस्य एवं पदाधिकारी तथा गोलासन ग्रामीण है जिन्होंने अभूत पूर्व मेहनत के द्वारा विकास करवाया जिससे
हजारो श्रद्वालुओं को सुविधा प्राप्त होती है। इच्छापूर्ण श्री हनुमान जी की मुर्ति लगभग हजारो साल पुरानी है पास में नेशनल हाइवे आने के कारण यहां
श्रद्वालुओं की आवक भी बड़ी है। शरद पूर्णिमा को झलकता है आस्था का ज्वार. इच्छापूर्ण हनूमान मन्दिर में शरद पूर्णिमा को हर साल विशाल भजन संध्या के साथ आस्था का ज्वार उमड़ता है बड़ी संख्या में भक्त श्री हनुमान जी के मन्दिर में भक्ती का आनंद लेते है इस दौरान महिला मण्डल द्वारा भजन की प्रस्तुति की जाती है।

सूर्योदय के साथ इच्छापूर्ण हनुमान जी के दर्शन के लिए लोग आते है अलसवेरे श्री हनुमान जी के दर्शन के बाद ही अन्य कार्य करते हैं।
इस प्रकार मन्दिर आस्था का केन्द्र बन गया है वही मंगलवार व शनिवार को विशेष पूजा अर्चना के साथ हनुमान जी मन्दिर में सिंदूर तेल चढ़ाया जाता है। घी खोपरे का भोग लगाया जाता है।

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