सरसों एक राजस्थान की प्रमुख फसल है सरसों की फसल में रोग, सरसों में खाद व उर्वरक 

सरसों एक राजस्थान की प्रमुख फसल है सरसों की फसल में रोग, सरसों में खाद व उर्वरक 

सरसों एक राजस्थान की प्रमुख फसल है

सरसों एक राजस्थान की प्रमुख फसल है। सरसों को बोने का समय सितम्बर व अक्टूम्बर  में होता है। और ये सरसों फसल एक तेलीय पदार्थ है। इस फसल में 18 से 25′ सेल्सियस तापमान की जरूरत होती है बोने से पहले खाद व् उर्वरक डाला जाता है। गोबर खाद सबसे पहले डाला जाता है। उसके बाद में फसल बोई जाती है। 2 – 3 पानी देने के बाद 30 – 35 दिनों बाद खरपतवार अधिक आ जाता है निराई – गुड़ाई करने के बाद यूरिया खाद डाला जाता है और फिर पानी दिया जाता है सरसों की फसल के फुल आते समय वर्षा अधिक आद्रता एवं वायु में बादल छाए रहते है तो इस प्रकार का मोसम रहता हे तो सरसों की फसल जल्दी से पकने आ जाती है। और इसमें खाद और डीएपी डाला जाता है बोते समय डीएपी का प्रयोग में लेते है खरपतवार करने के साथ साथ में अनेक प्रकार के खरपतवार उग जाते है इनको नियंत्रण करने के लिए निराई – गुड़ाई करनी पडती है इस फसल में छिडकाव करने के लिए फ्लेट फेन या फल्ड जेट नोजल का प्रयोग किया जाता है। सरसों की फसल में नुकसान अधिक होता है। इनको नियन्त्रण करने लिए अधिक दवाईयों का छिडकाव करना पड़ता है।

सरसों फसल में नुकसान करने वाले रोग – आरा मक्खी – यह मक्खी सरसों की फसल में पत्तियों को किनारे से और पत्तियों में छेद कर तेजी से खाती है इस कारण पुरा पोधा खराब हो जाता है चित्रित बग – यह चमकीली, काले, नारंगी, एवं लाल रंग के होते है और पत्तियों, शाखा, तनो, फुल एवं फलियों का रस चूसते है और पत्तियों किनारों से सुख कर गिर जाती है। माँहु रोग – इस किट की पीलापन लिए हुए हरे रंग के होते है जो पोधो को कोमल तनो, पत्तियों फूलो, एवं नये फलियों के रस चूसकर कमजोर कर देते है। पत्ती सुरंगक किट – सडी पत्तियों में सुरंग बनाकर हरे भाग को खाती है जिसमे पत्तियों में अनियमित आकार की सफेद रंग की रेखाए बन जाती है। फिर  मार्च एवं अप्रैल में सरसों की फसल पूरी तरह से पक जाती है। फिर फसल को कटिंग करके सूखने के बाद पाला बनाकर थोड़े दिन सूखने के बाद में थ्रेसर से फसल को ली जाती है। सरसों का उपयोग – सरसों का तेल खाने में काम आता है और जोड़ो में दर्द तेल से मालिश, भूख बढ़ाने में मददगार, वजन घटाने में मददगार, दांत दर्द में फायदेमंद है।

सरसों की बुवाई का समय  –

  • सरसों की बुवाई का समय सितम्बर व अक्टूम्बर माह में की जाती है। इसी महीनो में किसान बुवाई करने में जुट जाते है और यही समय बोने का है।

सरसों में खाद व उर्वरक  –

  • सबसे पहले गोबर खाद डाला जाता है।
  • जिप्सम खाद जमीन को नमी करने में जिप्सम खाद को डाला जाता है। इससे पोधे की जड़े आसानी से जमीन के अन्दर चली जाती है।
  • डीएपी खाद बीज को बोते समय बीज  के साथ डाला जाता है। इससे पोधे जल्दी से विकसित होता है।
  • यूरिया खाद को निराई – गुड़ाई करने के पत्चात डाला जाता है इससे फसल जल्दी से मजबूत व बडी हो जाए

सरसों की फसल में खरपतवार –

  • सरसों की फसल में खरपतवार करने के साथ साथ में अनेक प्रकार के खरपतवार उग जाते है।
  • खरपतवार को नियंत्रण करने के लिए निराई – गुड़ाई करनी जरूरी है।
  • निराई – गुड़ाई सिर्फ 4 – 5 बार ही की जाती है।

सरसों की फसल में सिंचाई  –

  • सरसों की फसल में बुवाई करने के बाद  1 – 2  ही पानी दिया जाता है।
  • इसके बाद 25-30 दिन के बाद निराई  गुड़ाई के बाद पानी दिया जाता है।
  • सरसों की फसल में 15 – 20 पानी छिडकाव किये जाते है।

सरसों की फसल में छिडकाव  –

  • सरसों की फसल में छिडकाव करने के लिए विभिन्न प्रकार सेट मिलते है।
  • फ्लेट फैन से फसल में छिडकाव किया जाता है।
  • फल्ड जैट नोजल से फसल में छिडकाव किया जाता है।
  • मिनी फव्वारे से छिडकाव किया जाता है।

सरसों की फसल में तापमान  –

  • सरसों की फसल में तापमान की जरूरत अधिक होती है।
  • सरसों की फसल में तापमान 18 से 25′ सेल्सियस तापमान की जरूरत है।

सरसों की फसल में रोग  –

  • आरा मक्खी  –  यह मक्खी सरसों की फसल में पत्तियों को किनारों से और पत्तियों में छेद कर तेजी से खाती है। इस कारण पुरा पोधा ख़राब हो जाता है।
  • चित्रित बग  – यह चमकीले काले, नारंगी, लाल, रंग के होते है और पत्तियों, शाखा, तनो, फूलो, फलियों, का रस चूसते है। फिर पत्तियों किनारों से सुख कर गिर जाती है।
  • मांहू रोग – इस किट की पीलापन लिए हुए हरे रंग के होते है जो पोधो के कोमल तनो, पत्तियों, फूलो, एवं नये पत्तियों के रस चूसकर कमजोर कर देते है।
  • पत्ती सुरंगक किट  – सड़ी पत्तियों में सुरंग बनाकर हरे भाग को खाती है। जिसके कारण पत्तियों में अनियमित आकार की सफेद रंग की रेखाए बन जाती है।

सरसों की फसल पकने व कटाई का समय  –

  • सरसों की फसल में पानी 15 – 16 पानी का छिडकाव किये जाते है।
  • सरसों की फसल में खरपतवार करने के बाद में छिडकाव किये जाते है।
  • सरसों की फसल पकने का समय फरवरी व मार्च माह में होता है।
  • सरसों की फसल कटाई करने का समय मार्च व अप्रैल माह में किया जाता है।

सरसों की फसल में छिड्काव  –

  • सरसों की फसल में फ्लेट फैन से छिडकाव किया जाता है।
  • फल्ड जेट नोजल से छिडकाव किये जाते है।
  • मिनी नोजल से छिडकाव किये जाते है।

सरसों का उपयोग  –

  • सरसों का तेल खाध्यान के रूप में काम लिया जाता है।
  • सरसों का उपयोग जोड़ो में दर्द तेल से मालिश करना
  • भूख बढ़ाने में मददगार
  • वजन घटाने में मददगार
  • दांत दर्द में फायदेमंद
  • सरसों के तेल से फ़ायदे मांसपेशीयो में दर्द, छालरोग, दाद सूजन,
  • अस्थमा की रोकथाम
  • रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए

 

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