जानिए केसे होती है जीरा की खेती, जीरा में खाद व उर्वरक & जीरा की फसल में रोग 

जानिए केसे होती है जीरा की खेती, जीरा में खाद व उर्वरक & जीरा की फसल में रोग 

जीरा एक फसल है जो सभी घरो में रसोईघर में पाई जाती है एक मसाले के रूप में इनका उपयोग किया जाता है इसकी मांग पुरे देश में है जिसके कारण किसानो को अच्छी कीमत मिल जाती है जीरा की खेती में सही तरीके से मोसम बीज खाद तथा सिंचाई की जानकारी नही रहने से नुकसान उठाना पड़ता है जीरा की खेती सर्दी के मोसम में की जाती है इसका बोने का समय नवम्बर व् दिसम्बर में की जाती है खेत को तेयार करते समय रोटावेटर से जुताई कर मिट्टी को छोटी छोटी कर दी जाती है इसमें सिंचाई करने में और खरपतवार करने में आसानी रहे। खाद उर्वरक – गोबर को बुवाई करते समय डाला जाता है जीरा को बोते समय डीएपी खाद डाला जाता है। सिंचाई – सिंचाई बुवाई के तुरंत बाद करनी चाहिए इसमें हल्की सिंचाई की जाती है इसमें तेज धार से छिडकाव न करे क्योकि इसमें अधिक छिडकाव होने से एक ही जगह पानी जमा हो जाता है। इसके बाद में खरपतवार करने का समय आ जाता है निराई – गुड़ाई करने के बाद यूरिया खाद डाल कर फिर पानी छिडकाव किया जाता है। इसके बाद में 3 – 4 खरपतवार की जाती है और 4- 5 पानी जीरे में दिए जाते है और उसके बाद जीरा पकने आ जाता है। फिर पानी से छोड़ दिया जाता है और उसके बाद जीरा सूखने शुरू हो जाता है काटने का समय मार्च – अप्रैल में होता है कटिंग करने के बाद में सब इक्ठटा करके पाला बनाकर थोड़े दिन सूखने के बाद उसको थ्रेसर से लिया जाता है। जीरे में लगने वाले रोग पोधे में बधवार रुक जाता है तथा पत्तियों मुरझा जाती है।

जीरा की बुवाई का समय  –

  • जीरा की बुवाई का समय नवम्बर व दिसम्बर माह में की जाती है।
  • अधिकतर किसान इसी माह में बुवाई करने जुट जाते है।

जीरा में खाद व उर्वरक  –

  • सबसे पहले गोबर खाद डाला जाता है।
  • जिप्सम खाद जमीन को नमी करने में जिप्सम खाद को डाला जाता है। इससे पोधे की जड़े आसानी से जमीन के अन्दर चली जाती है।
  • डीएपी खाद बीज को बोते समय बीज  के साथ डाला जाता है। इससे पोधे जल्दी से विकसित होता है।
  • यूरिया खाद को निराई – गुड़ाई करने के पत्चात डाला जाता है इससे फसल जल्दी से मजबूत व बडी हो जाए

जीरा की फसल में खरपतवार  –

  • जीरा की फसल में खरपतवार करने के साथ साथ में अनेक प्रकार के खरपतवार उग जाते है।
  • खरपतवार को नियंत्रण करने के लिए निराई – गुड़ाई करनी जरूरी है।
  • निराई – गुड़ाई सिर्फ 4 – 5 बार ही की जाती है।

जीरा की फसल में सिंचाई  –

  • जीरा की फसल में बुवाई करने के बाद  1 ही पानी दिया जाता है।
  • इसके बाद 25-30 दिन के बाद निराई  गुड़ाई के बाद पानी दिया जाता है।
  • जीरा की फसल में4 – 5 पानी छिडकाव किये जाते है।

जीरा की फसल में छिडकाव  –

  • जीरा की फसल में छिडकाव करने के लिए विभिन्न प्रकार सेट मिलते है।
  • फ्लेट फैन से फसल में छिडकाव किया जाता है।
  • फल्ड जैट नोजल से फसल में छिडकाव किया जाता है।
  • मिनी फव्वारे से छिडकाव किया जाता है।

जीरा  की फसल में तापमान  –

  • जीरा की फसल में तापमान की जरूरत अधिक होती है।
  • जीरा की फसल में तापमान 24 से 28′ सेंटीग्रैड तापमान की जरूरत है।

जीरा की फसल में रोग  –

  • झुलसा रोग  – यह रोग अल्टरनेरिया बोनिसी नामक कवक होता है झुलसा रोग के प्रकोप से प्रभावित पोधो पर भूरे काले धब्बे दिखाई देते है जो बाद में गहरे काले हो जाते है। फसल में फुल वाली अवस्था में अगर आकाश में बादल छाए रहे तो इस रोग का प्रकोप बढ़ जाता है इस रोग में ग्रसित पोधो की उपज व गुणवता में कमी आ जाती है।
  • चरमा रोग  – चरमा रोग से वर्षा, ओस और बादलो को देखते हुए जीरे की फसल में चरमा झुलसा या ब्लास्ट रोग लगने का खतरा रहता है।
  • मोयला  – इसके आक्रमण से फसल को काफी नुकसान होता है यह किट पोधे के कोमल भाग से रस चूसकर हानि पहुचाते है इसका प्रकोप प्राय फसल में फुल आने के समय प्रारम्भ होता है।

जीरा  की फसल पकने व कटाई का समय  –

  • जीरे की फसल में पानी 4-5 पानी का छिडकाव किये जाते है।
  • जीरे की फसल में खरपतवार करने के बाद में छिडकाव किये जाते है।
  • जीरे की फसल पकने का समय फरवरी व मार्च माह में होता है।
  • जीरे  की फसल कटाई करने का समय मार्च व अप्रैल माह में किया जाता है।

जीरे की फसल में छिड्काव  –

  • जीरे की फसल में फ्लेट फैन से छिडकाव किया जाता है।
  • फल्ड जेट नोजल से छिडकाव किये जाते है।
  • मिनी नोजल से छिडकाव किये जाते है।

जीरे की फसल का उपयोग  –

  • जीरे को पाचन क्रिया के लिए जीरा बहुत अच्छा रहता है।
  • जीरे को खाने के रूप में काम में लेते है।
  • जीरे में मोजूद केल्शिय्म हडियो को मजबूत करता है।
  • शुगर के मरीजो के लिए भी फायदेमंद है।
  • जीरे की दवा के रूप में उपयोग होता है।

जीरे की खेती कहाँ होती है –

  • जीरे की खेती गुजरात व राजस्थान में होती है।
  • भारत में जीरे का सबसे अधिक उत्पादन गुजरात में ही होता है।
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