मैथी

मैथी

मैथी की फसल को बोने का समय अक्टूम्बर से नवम्बर माह में बुवाई की जाती है मैथी की खेती रबी के मौसम में की जाती है। अधिकतर किसान इस महीने में बुवाई करने जुट जाते है। सबसे पहले कल्टीवेटर से खेत को दलदल किया जाता है और उसके बाद में गोबर खाद डाला जाता है फिर जिप्सम खाद से मिटटी को नर्म किया जाता है। और उसके बाद बीज को डीएपी खाद को मिलाकर बोया जाता है फिर पानी का छिडकाव किया जाता है। छिडकाव करने के बाद में 25 – 30 दिनों  के  बाद खरपतवार करने आ जाती है खरपतवार को रोकथाम के लिए केमिकल दवा का छिडकाव करना जरूरी है। निराई – गुड़ाई करने बाद यूरिया खाद डाल कर पानी का छिडकाव किया जाता है इस कारण मैथी का पोधा जल्दी से विकसित हो जाता है। इसकी हर बार कटाई की जाती है  इसको  खाने के रूप में लेते और हरी सब्जी बनाने में काम आती है। इसको सुखाकर भी सब्जी में डाल सकते है।

मैथी की बुवाई का समय  –

  • मैथी की  बुवाई का समय अक्टूम्बर से नवम्बर माह में किया जाता है।
  • मैथी की बुवाई का समय इसी महीने में किसान जुट जाते है।

मैथी में खाद व उर्वरक  –

  • सबसे पहले गोबर खाद डाला जाता है।
  • जिप्सम खाद जमीन को नमी करने में जिप्सम खाद को डाला जाता है। इससे पोधे की जड़े आसानी से जमीन के अन्दर चली जाती है।
  • डीएपी खाद बीज को बोते समय बीज  के साथ डाला जाता है। इससे पोधे जल्दी से विकसित होता है।
  • यूरिया खाद को निराई – गुड़ाई करने के पत्चात डाला जाता है इससे फसल जल्दी से मजबूत व बडी हो जाए

मैथी की फसल में खरपतवार –

  • खरपतवार का नियंत्रण करने के लिए केमिकल – दवा का छिडकाव करना जरूरी है।
  • सोंफ की फसल में खरपतवार करने के साथ साथ में अनेक प्रकार के खरपतवार उग जाते है।
  • खरपतवार को नियंत्रण करने के लिए निराई – गुड़ाई करनी जरूरी है।
  • निराई – गुड़ाई सिर्फ 4 – 5 बार ही की जाती है।

मैथी की फसल में सिंचाई  –

  • मैथी की फसल में बुवाई करने के बाद  1 – 3  ही पानी दिया जाता है।
  • इसके बाद 25-30 दिन के बाद निराई  गुड़ाई के बाद पानी दिया जाता है।
  • मैथी की फसल में अधिकतम पानी छिडकाव किये जाते है।

मैथी की फसल में छिडकाव  –

  • मैथी की फसल में छिडकाव करने के लिए विभिन्न प्रकार सेट मिलते है।
  • फ्लेट फैन से फसल में छिडकाव किया जाता है।
  • फल्ड जैट नोजल से फसल में छिडकाव किया जाता है।
  • मिनी फव्वारे से छिडकाव किया जाता है।

मैथी की फसल में तापमान  –

  • मैथी की फसल में तापमान की जरूरत अधिक होती है।
  • मैथी की फसल में तापमान 25 से 30′ सेल्सियस तापमान की जरूरत है।

मैथी की फसल में रोग –

  • मैथी की फसल में छाछया रोग – यह रोग इस फसल में शुरुआत में लग जाता है इससे पुरा पोधा खराब हो जाता है।
  • जड गलन रोग – यह मैथी का मृदा जनित रोग है जिसमे  रोग के प्रारभ में पत्तियाँ पिली पड़कर सूखना प्रारभ होती है बाद में पुरा पोधा सुख जाता है।
  • दीमक रोग – दीमक मैथी की फसल के विभिन्न भागो को खाकर हनी पहुचाते है।

मैथी की फसल पकने व् कटाई करने का समय –

  • मैथी की फसल पकने का समय फरवरी माह में आ जाती है।
  • मैथी की फसल कटाई मार्च व् अप्रैल में आ जाती है।
  • मैथी की फसल की बार बार कटाई की जाती है।

मैथी की फसल में छिड्काव  –

  • मैथी की फसल में फ्लेट फैन से छिडकाव किया जाता है।
  • फल्ड जेट नोजल से छिडकाव किये जाते है।
  • मिनी नोजल से छिडकाव किये जाते है।

मैथी के उपयोग व् फायदे  –

  • मैथी की दाल को खाने के रूप में उपयोग में लेते है।
  • डायबिटीज – शुगर के मरीजो को अक्सर अपनी डाईट में मैथी के दाने शामिल करने के लिए किया जाता है।
  • केंसर – मैथी के दानो से निकला तेल केंसर से लड़ने में सहायक होता है।
  • मैथी से हर तरह की बीमारी का ईलाज होता है।

 

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